सावधान: देश के सौहार्द को बिगाड़ सकता है पी.एफ.आई
हॉल ही में जी घटित हाथरस काण्ड में पहुंचे आप पार्टी नेता संजय सिंह पर फेंकी गई।काली स्याही के बीच पी एफ आई एजेंट की गूंज ने मानो।एक पल के लिए देश की खुफिया एजेंसियों के माथे पर बल डाल दिया हो।शाहीन बाग में सी ए ए/एन आर सी व एन पी आर परमची बवाल के दौरान भर के दंगो में आप पार्टी नेता ताहिर हुसेन वह संजय सिंह का नाम भी शामिल था। बताते चलें पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पी एफ आई की स्थापना वर्ष 2006 केरल में की गयी थी। इसका मुख उद्देश पाकिस्तान के इशारों पर भारत में जेहादी प्लेटफार्म तैयार करना।मस्जिद मन्दिर में कब्जा जिहाद, लव जिहाद, जनसंख्या जिहाद, हलाला जिहाद, जकात माफिया जिहाद हिंदुत्व के खिलाफ नव युवकों का ब्रेन वॉश कर उन्हें कट्टरपंथी बनाना उदारवादी मुस्लिमों पर हमले कर उनको डराना प्राथमिकता रहती है।वर्ष 1977 में सिमी संगठन की नीव अलीगढ़ में पड़ी थीं। जमाते इस्लामी की शाखा के रूप में आतंकी संगठन गतिविधियों में शामिल होने के साक्ष्य मिलने पर बीजेपी सरकार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्ष 2001 में इसे प्रतिबंधित कर दिया था।अपने मंसूबे को सफल बनाने के लिए वर्ष 2006 ने इसने अपने को पी एफ आई में विलय कर लिया था। नागरिक पुलिस के मुखबिर तन्त्र में अहम सक्रीयता के कारण बहुचर्चा का फायदा उठाकर व राजनैतिक शाखा एसपीडीआई बना ली। यह राजनैतिक दल दक्षिण प्रदेशों के चुनाव में हिस्सा लेते है। जिले के थानास्तर पर गठित एस-10 टीम में शामिल कई हिस्ट्रीशीटर भी पी.एफ.आई. पार्टी के मुखिया थे। लेकिन लाख शिकायतों के बावजूद भी तत्कालीन एसएसपी अनंत देव तिवारी ने कोई कड़ा एक्शन नहीं लिया। आखिर में एसएसपी प्रीतिंदर सिंह ने इसे भंग किया। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार ऐसे संगठनों के संचालन का रिमोट, देश के खिलाफ नापाक इरादे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के हाथ है। पी.एफ.आई, एस.डी.पी.आई, एनडीएफ, सिमी (प्रतिबंधित संगठन) पड़ोसी मुल्क की नापाक शाखाएं है। इनकी सोशल वेबसाइटों पर इनकी मंशा साफ झलकती है। फिर भी यह संगठन अभी तक आखिर प्रतिबन्धित क्यों नहीं किये गये। कब तक देश में धर्म के नाम उन्माद तथा राजनीति होती रहेगी। कहीं इसका कारण लचर कानून प्रणाली तो नहीं। यही सबसे बड़ा सवाल है।
सावधान: देश के सौहार्द को बिगाड़ सकता है पी.एफ.आई